अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा
सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए
- कृष्ण बिहारी नूर
आरज़ू हसरत और उम्मीद शिकायत आँसू
इक तिरा ज़िक्र था और बीच में क्या क्या निकला
- सरवर आलम राज़
जिस की ख़ातिर मैं भुला बैठा था अपने आप को
अब उसी के भूल जाने का हुनर भी देखना
- अताउल हक़ क़ासमी
दोस्त अहबाब से लेने न सहारे जाना
दिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना
- अब्दुल अहद साज़
Urdu Poetry: दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है