अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दुआ करो कि मैं उस के लिए दुआ हो जाऊँ
वो एक शख़्स जो दिल को दुआ सा लगता है
- उबैदुल्लाह अलीम
मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं
मैं आदमी हूँ मिरा ए'तिबार मत करना
- आसिम वास्ती
मिरी तरफ़ से तो टूटा नहीं कोई रिश्ता
किसी ने तोड़ दिया ए'तिबार टूट गया
- अख़्तर नज़्मी
रात की बात का मज़कूर ही क्या
छोड़िए रात गई बात गई
- चराग़ हसन हसरत
Urdu Poetry: गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन