Urdu Poetry: वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो हौसले मुश्किलों में पलते हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो
हौसले मुश्किलों में पलते हैं
- महफूजुर्रहमान आदिल 

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जिस की ख़ातिर मैं भुला बैठा था अपने आप को
अब उसी के भूल जाने का हुनर भी देखना
- अताउल हक़ क़ासमी 

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किसी भी प्यास के मारे की प्यास बुझ न सकी
समुंदरों में तो आते रहे उछाल बहुत
- बख़्श लाइलपुरी 

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शाम से पहले तिरी शाम न होने दूँगा
ज़िंदगी मैं तुझे नाकाम न होने दूँगा
- साबिर ज़फ़र 

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Urdu Poetry: सारे जज़्बों के बाँध टूट गए उस ने बस ये कहा इजाज़त है

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