Urdu Poetry: याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते
याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते
- फ़ना निज़ामी कानपुरी  

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यूँ तिरी याद में दिन रात मगन रहता हूँ
दिल धड़कना तिरे क़दमों की सदा लगता है
- शहज़ाद अहमद

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शीशा टूटे ग़ुल मच जाए
दिल टूटे आवाज़ न आए
- हफ़ीज़ मेरठी 

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तुझ से बिछड़ूँ तो कोई फूल न महके मुझ में
देख क्या कर्ब है क्या ज़ात की सच्चाई है
- नसीर तुराबी 

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क़ुबूल कर के इसे राब्ता बहाल करो
कहीं ये फूल मिरी आख़िरी पुकार न हो
- आशू मिश्रा

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शाख़ पर हों कि उन के जूड़े में
उम्र है एक रात फूलों की
- शाद फ़िदाई देहलवी 

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Urdu Poetry: लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे

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