Urdu Poetry: अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे
अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ
- क़तील शिफ़ाई

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तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा
- बशीर बद्र

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इक शजर ऐसा मोहब्बत का लगाया जाए
जिस का हम-साए के आँगन में भी साया जाए
- ज़फर ज़ैदी

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रंजिशें ऐसी हज़ार आपस में होती हैं दिला
वो अगर तुझ से ख़फ़ा है तू ही जा मिल क्या हुआ
- जुरअत क़लंदर बख़्श

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नामा-बर तू ही बता तू ने तो देखे होंगे
कैसे होते हैं वो ख़त जिन के जवाब आते हैं
- क़मर बदायूंनी

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तुम्हारे ख़त में नज़र आई इतनी ख़ामोशी
कि मुझ को रखने पड़े अपने कान काग़ज़ पर
- यासिर ख़ान इनाम

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Urdu Poetry: पता अब तक नहीं बदला हमारा

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