Urdu Poetry: तुम न आए ख़्वाब में आँखों में ख़्वाब आया तो क्या

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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रात को सोना न सोना सब बराबर हो गया
तुम न आए ख़्वाब में आँखों में ख़्वाब आया तो क्या
- जलील मानिकपुरी 

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ये जब है कि इक ख़्वाब से रिश्ता है हमारा
दिन ढलते ही दिल डूबने लगता है हमारा
- शहरयार  

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बड़ी आरज़ू थी हम को नए ख़्वाब देखने की
सो अब अपनी ज़िंदगी में नए ख़्वाब भर रहे हैं
- उबैदुल्लाह अलीम   

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सुना है ख़्वाब मुकम्मल कभी नहीं होते
सुना है इश्क़ ख़ता है सो कर के देखते हैं
- हुमैरा राहत 

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अब घर भी नहीं घर की तमन्ना भी नहीं है
मुद्दत हुई सोचा था कि घर जाएँगे इक दिन
- साक़ी फ़ारुक़ी

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गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन
ऐसा लगा बसर हुए जन्नत में चार दिन
- ए जी जोश  

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Urdu Poetry: दिल लगाओ तो लगाओ दिल से दिल

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