Urdu Poetry: मैं उस के सामने से गुज़रता हूँ इस लिए

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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मैं उस के सामने से गुज़रता हूँ इस लिए
तर्क-ए-तअल्लुक़ात का एहसास मर न जाए
- फ़ना निज़ामी कानपुरी   

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क़िस्सा-ए-दर्द को करते हुए ज़ब्त-ए-तहरीर
रोते रोते भी तिरे नाम पे हँस देता हूँ
- बर्क़ आशियान्वी

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कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी
- जावेद अख़्तर

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दर-ब-दर ठोकरें खाईं तो ये मालूम हुआ
घर किसे कहते हैं क्या चीज़ है बे-घर होना
- सलीम अहमद

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ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम
मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं
- इमाम बख़्श नासिख़

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ज़िंदगी शायद इसी का नाम है
दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाइयाँ
- कैफ़ भोपाली

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Urdu Poetry: वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो

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