अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
ज़िंदगी क्या है आज इसे ऐ दोस्त
सोच लें और उदास हो जाएँ
- फ़िराक़ गोरखपुरी
इश्क़ को एक उम्र चाहिए और
उम्र का कोई ए'तिबार नहीं
- जिगर बरेलवी
तेरे बग़ैर भी तो ग़नीमत है ज़िंदगी
ख़ुद को गँवा के कौन तिरी जुस्तुजू करे
- अहमद फ़राज़
आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे
तितलियाँ मंडला रही हैं काँच के गुल-दान पर
- शकेब जलाली
Zindagi Shayari: ज़िंदगी इक अजब पहेली है