Urdu Poetry: इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए
आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए
- मुनव्वर राना

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क्या तिरे शहर के इंसान हैं पत्थर की तरह
कोई नग़्मा कोई पायल कोई झंकार नहीं
- कामिल बहज़ादी

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ये शाइ'री ये किताबें ये आयतें दिल की
निशानियाँ ये सभी तुझ पे वारना होंगी
- मोहसिन नक़वी 

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दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिए
वो तिरा कोठे पे नंगे पाँव आना याद है
- हसरत मोहानी

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Urdu Poetry: वो कहीं भी गया लौटा तो मिरे पास आया

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