Urdu Poetry: यूँ चुराईं उस ने आँखें सादगी तो देखिए

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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यूँ चुराईं उस ने आँखें सादगी तो देखिए
बज़्म में गोया मिरी जानिब इशारा कर दिया
- फ़ानी बदायूंनी 

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तुम अभी शहर में क्या नए आए हो
रुक गए राह में हादसा देख कर
- बशीर बद्र  

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छेड़ कर जैसे गुज़र जाती है दोशीज़ा हवा
देर से ख़ामोश है गहरा समुंदर और मैं
- ज़ेब ग़ौरी

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सफ़र का एक नया सिलसिला बनाना है
अब आसमान तलक रास्ता बनाना है
- शहबाज़ ख़्वाजा

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मुसाफ़िरों से मोहब्बत की बात कर लेकिन
मुसाफ़िरों की मोहब्बत का ए'तिबार न कर
- उमर अंसारी

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ख़ुशी के फूल खिले थे तुम्हारे साथ कभी
फिर इस के ब'अद न आया बहार का मौसम
- सलाम संदेलवी

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Urdu Poetry: आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं

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