Urdu Poetry: वही कारवाँ वही रास्ते वही ज़िंदगी वही मरहले

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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वही कारवाँ वही रास्ते वही ज़िंदगी वही मरहले
मगर अपने अपने मक़ाम पर कभी तुम नहीं कभी हम नहीं
- शकील बदायूंनी  

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हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल
ऐ ज़िंदगी वगर्ना ज़माने में क्या न था
- आज़ाद अंसारी

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क़िस्सा-ए-दर्द को करते हुए ज़ब्त-ए-तहरीर
रोते रोते भी तिरे नाम पे हँस देता हूँ
- बर्क़ आशियान्वी

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तारीफ़ उस ख़ुदा की जिस ने जहाँ बनाया
कैसी ज़मीं बनाई क्या आसमाँ बनाया
- इस्माइल मेरठी

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आसमानों में उड़ा करते हैं फूले फूले
हल्के लोगों के बड़े काम हवा करती है
- मोहम्मद आज़म

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सुना है शहर में ज़ख़्मी दिलों का मेला है
चलेंगे हम भी मगर पैरहन रफ़ू कर के
- मोहसिन नक़वी 

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Urdu Poetry: इक मुसाफ़िर भी क़ाफ़िला है मुझे

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