अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
तमाम रात नहाया था शहर बारिश में
वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे
- जमाल एहसानी
फ़लक पर उड़ते जाते बादलों को देखता हूँ मैं
हवा कहती है मुझ से ये तमाशा कैसा लगता है
- अब्दुल हमीद
आ गए हैं 'अबीर' कूचे में
पहली बरसात और हम दोनों
- शाहरुख़ अबीर
मैं उस के वादे का अब भी यक़ीन करता हूँ
हज़ार बार जिसे आज़मा लिया मैं ने
- मख़मूर सईदी
जब नहीं कुछ ए'तिबार-ए-ज़िंदगी
इस जहाँ का शाद क्या नाशाद क्या
- इम्दाद इमाम असर
''आप की याद आती रही रात भर''
चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Urdu Poetry: मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूँ