अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मैं अब किसी की भी उम्मीद तोड़ सकता हूँ
मुझे किसी पे भी अब कोई ए'तिबार नहीं
- जव्वाद शैख़
बस इस सबब से कि तुझ पर बहुत भरोसा था
गिले न हों भी तो हैरानियाँ तो होती हैं
- अहमद फ़राज़
ग़म है न अब ख़ुशी है न उम्मीद है न यास
सब से नजात पाए ज़माने गुज़र गए
- ख़ुमार बाराबंकवी
मेरे कहने में है दिल जब तक मिरे पहलू में है
आप ले लीजे इसे ये आप का हो जाएगा
- बेख़ुद देहलवी
कौन सी बात है तुम में ऐसी
इतने अच्छे क्यूँ लगते हो
- मोहसिन नक़वी
उस से मिलने की ख़ुशी ब'अद में दुख देती है
जश्न के ब'अद का सन्नाटा बहुत खलता है
- मुईन शादाब
Urdu Poetry: ये ज़िंदगी जो पुकारे तो शक सा होता है