Urdu Poetry: दिल भी या-रब कई दिए होते

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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मेरी क़िस्मत में ग़म गर इतना था
दिल भी या-रब कई दिए होते
- मिर्ज़ा ग़ालिब 

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आग़ाज़-ए-मोहब्बत का अंजाम बस इतना है
जब दिल में तमन्ना थी अब दिल ही तमन्ना है
- जिगर मुरादाबादी

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उस को भी मेरी तरह अपनी वफ़ा पर था यक़ीं
वो भी शायद इसी धोके में मिला था मुझ को
- भारत भूषण पन्त 

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आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा
आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई
- इक़बाल अशहर  

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ख़बर सुन कर मिरे मरने की वो बोले रक़ीबों से
ख़ुदा बख़्शे बहुत सी ख़ूबियाँ थीं मरने वाले में
- दाग़ देहलवी

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शहर में अपने ये लैला ने मुनादी कर दी
कोई पत्थर से न मारे मिरे दीवाने को
- तुराब काकोरवी

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Urdu Poetry: इश्क़ इक क़ुदरती ग़ुलामी है

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