अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
धूप ने गुज़ारिश की
एक बूँद बारिश की
- मोहम्मद अल्वी
लकीरें खींच के मिट्टी पे बैठ जाता हूँ
यहाँ मकाँ था ये बाज़ार ये गली उस की
- अशरफ़ यूसुफ़ी
फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं
- साजिद प्रेमी
फूलों को सुर्ख़ी देने में
पत्ते पीले हो जाते हैं
- फ़हमी बदायूंनी
ख़ुशी के फूल खिले थे तुम्हारे साथ कभी
फिर इस के बाद न आया बहार का मौसम
- सलाम संदेलवी
'आलम' दिल-ए-असीर को समझाऊँ किस तरह
कम-बख़्त ए'तिबार के क़ाबिल नहीं है वो
- आलम ख़ुर्शीद
Urdu Poetry: वो किसी तरह त'अल्लुक़ को बचा लेता है