अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ऐ दोस्त
वो तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में
- फ़िराक़ गोरखपुरी
इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ
जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से
- साहिर लुधियानवी
यही ज़िंदगी मुसीबत यही ज़िंदगी मसर्रत
यही ज़िंदगी हक़ीक़त यही ज़िंदगी फ़साना
- मुईन अहसन जज़्बी
मौत कहते हैं जिस को ऐ 'साग़र'
ज़िंदगी की कोई कड़ी होगी
- साग़र सिद्दीक़ी
अदा हुआ न क़र्ज़ और वजूद ख़त्म हो गया
मैं ज़िंदगी का देते देते सूद ख़त्म हो गया
- फ़रियाद आज़र
ऐ अदम के मुसाफ़िरो होशियार
राह में ज़िंदगी खड़ी होगी
- साग़र सिद्दीक़ी
Urdu Poetry: हम परिंदों से हुनर छीनेगा कौन