अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
- निदा फ़ाज़ली
वो किसी तरह त'अल्लुक़ को बचा लेता है
जब बिछड़ जाने के इम्कान नज़र आते हैं
- अनम ज़ामी
बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं
लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं
- उमैर नजमी
इस बार देख ऐसा भी मुमकिन है मेरे दोस्त
मैं अपना भूल जाऊँ पता तेरे शहर में
- सोनिया सोनम अक्स
दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए
- अब्दुल हमीद अदम
पुराने यार भी आपस में अब नहीं मिलते
न जाने कौन कहाँ दिल लगा के बैठ गया
- फ़ाज़िल जमीली
Urdu Poetry: जाने क्यूँ इक ख़याल सा आया