Urdu Poetry: कि पास उन के रहता हूँ मैं दूर हो कर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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वो दिल ले के ख़ुश हैं मुझे ये ख़ुशी है
कि पास उन के रहता हूँ मैं दूर हो कर
- जलील मानिकपुरी  

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ढूँढ़ लाया हूँ ख़ुशी की छाँव जिस के वास्ते
एक ग़म से भी उसे दो-चार करना है मुझे
- ग़ुलाम हुसैन साजिद

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दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है
चले आओ जहाँ तक रौशनी मा'लूम होती है
- नुशूर वाहिदी

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कम से कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नहीं
ज़िंदगी तू ने तो धोके पे दिया है धोका
- फ़िराक़ गोरखपुरी 

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Urdu Poetry: वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो हौसले मुश्किलों में पलते हैं

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