अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़हम को तुझ से हैं उमीदें
ये आख़िरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ
- अहमद फ़राज़
यहाँ किसी को भी कुछ हस्ब-ए-आरज़ू न मिला
किसी को हम न मिले और हम को तू न मिला
- ज़फ़र इक़बाल
सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं
जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं
- सुदर्शन फ़ाकिर
वो जिस घमंड से बिछड़ा गिला तो इस का है
कि सारी बात मोहब्बत में रख-रखाव की थी
- अहमद फ़राज़
Urdu Poetry: तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे