Urdu Poetry: आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं
आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं
- ज़ेहरा निगाह

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वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं
- फ़रहत एहसास

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अब मिरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या
- जौन एलिया

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भेज दी तस्वीर अपनी उन को ये लिख कर 'शकील'
आप की मर्ज़ी है चाहे जिस नज़र से देखिए
- शकील बदायूंनी 

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यूँ तिरी याद में दिन रात मगन रहता हूँ
दिल धड़कना तिरे क़दमों की सदा लगता है
- शहज़ाद अहमद

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शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
- फ़िराक़ गोरखपुरी 

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Urdu Poetry: मैं जागता हूँ तिरा ख़्वाब देखने के लिए

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