अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर
जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
- अहमद फ़राज़
दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया
जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया
- जोश मलीहाबादी
वो नहीं भूलता जहाँ जाऊँ
हाए मैं क्या करूँ कहाँ जाऊँ
- इमाम बख़्श नासिख़
इक खिलौना जोगी से खो गया था बचपन में
ढूँढ़ता फिरा उस को वो नगर नगर तन्हा
- जावेद अख़्तर
कमरे में आ के बैठ गई धूप मेज़ पर
बच्चों ने खिलखिला के मुझे भी जगा दिया
- फ़ज़्ल ताबिश
आँखें न जीने देंगी तिरी बे-वफ़ा मुझे
क्यूँ खिड़कियों से झाँक रही है क़ज़ा मुझे
- इमदाद अली बहर
Urdu Poetry: गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले