अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है
हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है
- मंज़ूर हाशमी
यहाँ ग़रीब को सब कुछ तो दे दिया उस ने
ज़मीं बिछाए है और आसमान ओढ़े है
- अन्नू रिज़वी
आप सागर हैं तो सैराब करें प्यासे को
आप बादल हैं तो मुझ दश्त पे साया कीजिए
- अब्दुर्रहीम नश्तर
ग़म मुझे देते हो औरों की ख़ुशी के वास्ते
क्यूँ बुरे बनते हो तुम नाहक़ किसी के वास्ते
- रियाज़ ख़ैराबादी
इक अदना सा शा'इर हूँ मैं लाखों में
अपनी इक पहचान बनाता रहता हूँ
- अफ़ज़ल हज़ारवी
ज़िंदगी भर के लिए रूठ के जाने वाले
मैं अभी तक तिरी तस्वीर लिए बैठा हूँ
- क़ैसर-उल जाफ़री
Urdu Poetry: फिर भी लोग ख़ुदाओं जैसी बातें करते हैं