Urdu Poetry: मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूँ

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूँ
वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता
- अफ़ज़ल इलाहाबादी 

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हमेशा हाथों में होते हैं फूल उन के लिए
किसी को भेज के मंगवाने थोड़ी होते हैं
- अनवर शऊर

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लोग मिलते हैं फूल खिलते हैं
और हम तुम ख़िज़ाँ के मारे हैं
- अनन्या राय पराशर

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हम एक फ़िक्र के पैकर हैं इक ख़याल के फूल
तिरा वजूद नहीं है तो मेरा साया नहीं
- फ़ारिग़ बुख़ारी

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क्या ज़रा सा वक़्त बदला सब ने आँखें फेर लीं
बेबसी पर मुस्कुराते हैं मिरे अहबाब देख
- आदिल हेरा

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हमारे उस के दरमियाँ ये कैसा फ़ासला रहा
उसे भी सब ख़बर रही हमें भी सब पता रहा
- अन्नू रिज़वी

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Urdu Poetry: इक उम्र से मैं अपने ही साए में खड़ा हूँ

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