Urdu Poetry: इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
- निदा फ़ाज़ली 

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दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
- नासिर काज़मी   

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आज देखा है तुझ को देर के बअ'द
आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
- नासिर काज़मी

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जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ
जाने क्यूँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं
- क़तील शिफ़ाई 

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झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं
- कैफ़ी आज़मी

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आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होते तक
- मिर्ज़ा ग़ालिब

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Urdu Poetry: अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला

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