अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
सारे जज़्बों के बाँध टूट गए
उस ने बस ये कहा इजाज़त है
- ख़्वाजा साजिद
कैसी बिपता पाल रखी है क़ुर्बत की और दूरी की
ख़ुशबू मार रही है मुझ को अपनी ही कस्तूरी की
- नईम सरमद
यहाँ किसी को भी कुछ हस्ब-ए-आरज़ू न मिला
किसी को हम न मिले और हम को तू न मिला
- ज़फ़र इक़बाल
ज़ोर क़िस्मत पे चल नहीं सकता
ख़ामुशी इख़्तियार करता हूँ
- अज़ीज़ हैदराबादी
Urdu Poetry: वो कौन हमारा था जो वापस नहीं आया