Urdu Poetry: आवाज़ दे रहा था कोई मुझ को ख़्वाब में

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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आवाज़ दे रहा था कोई मुझ को ख़्वाब में
लेकिन ख़बर नहीं कि बुलाया कहाँ गया
- फ़ैसल अजमी 

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कैसा जादू है समझ आता नहीं
नींद मेरी ख़्वाब सारे आप के
- इब्न-ए-मुफ़्ती 

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रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया
अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया
- खालिद गनी      

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दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब
क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो
- अल्लामा इक़बाल  

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Urdu Poetry: उस की भी मिरी तरह थी इक अपनी कहानी

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