अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता
- फ़िराक़ गोरखपुरी
गँवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैं ने
वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने
- जौन एलिया
न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम
रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम
- फ़ानी बदायूंनी
दिल आबाद कहाँ रह पाए उस की याद भुला देने से
कमरा वीराँ हो जाता है इक तस्वीर हटा देने से
- जलील ’आली’
मुद्दत के ब'अद आज उसे देख कर 'मुनीर'
इक बार दिल तो धड़का मगर फिर सँभल गया
- मुनीर नियाज़ी
इश्क़ की चोट का कुछ दिल पे असर हो तो सही
दर्द कम हो या ज़ियादा हो मगर हो तो सही
- जलाल लखनवी
Urdu Poetry: एहसाँ ये कीजिए कि ये एहसाँ न कीजिए