अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
तुम्हारा हुस्न आराइश तुम्हारी सादगी ज़ेवर
तुम्हें कोई ज़रूरत ही नहीं बनने सँवरने की
- असर लखनवी
मैं अपने आप में गहरा उतर गया शायद
मिरे सफ़र से अलग हो गई रवानी मिरी
- अब्बास ताबिश
कभी किसी का तजस्सुस कभी ख़ुद अपनी तलाश
अजीब दिल है हमेशा सफ़र में रहता है
- चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी
कौन रहता है सफ़र में 'उम्र भर
मुस्तक़िल कोई ठिकाना चाहिए
- अवनीश त्रिवेदी अभय
चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है
- फ़रहत एहसास
तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी
कुछ अपना हाल सँभालूँ अगर इजाज़त हो
- जौन एलिया
Urdu Poetry: यही जाना कि कुछ न जाना हाए सो भी इक उम्र में हुआ मालूम