Urdu Poetry: दिल मोहब्बत से भर गया 'बेख़ुद'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली   

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दिल मोहब्बत से भर गया 'बेख़ुद'
अब किसी पर फ़िदा नहीं होता
- बेख़ुद देहलवी

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जिन को अपनी ख़बर नहीं अब तक
वो मिरे दिल का राज़ क्या जानें
- दाग़ देहलवी 

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यूँही दिल ने चाहा था रोना-रुलाना
तिरी याद तो बन गई इक बहाना
- साहिर लुधियानवी  

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दिल तो लेते हो मगर ये भी रहे याद तुम्हें
जो हमारा न हुआ कब वो तुम्हारा होगा
- बेख़ुद देहलवी  

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लोग नज़रों को भी पढ़ लेते हैं
अपनी आँखों को झुकाए रखना
- अख़्तर होशियारपुरी

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जंगल जंगल आग लगी है दरिया दरिया पानी है
नगरी नगरी थाह नहीं है लोग बहुत घबराए हैं
- जमील अज़ीमाबादी  

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