Urdu Poetry: बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

Image Credit :

बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना
जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता
- बशीर बद्र 

Image Credit :

भला हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले
न कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिजक गई
- बशीर बद्र

Image Credit :

टूट पड़ती थीं घटाएँ जिन की आँखें देख कर
वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए
- सज्जाद बाक़र रिज़वी

Image Credit :

मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं
मैं आदमी हूँ मिरा ए'तिबार मत करना
- आसिम वास्ती

Image Credit :

होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
- निदा फ़ाज़ली

Image Credit :

तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
- अल्लामा इक़बाल

Image Credit :

Urdu Poetry: इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओ

Read Now