Urdu Poetry: जीने के लिए इस दुनिया में ग़म की भी ज़रूरत होती है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं काँटों से भी ज़ीनत होती है
जीने के लिए इस दुनिया में ग़म की भी ज़रूरत होती है
- सबा अफ़ग़ानी

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इस तरफ़ से गुज़रे थे क़ाफ़िले बहारों के
आज तक सुलगते हैं ज़ख़्म रहगुज़ारों के
- साहिर लुधियानवी

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ज़रा देर बैठे थे तन्हाई में
तिरी याद आँखें दुखाने लगी
- आदिल मंसूरी

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बदल रहे हैं ज़माने के रंग क्या क्या देख
नज़र उठा कि ये दुनिया है देखने के लिए
- आफ़ताब हुसैन

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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
- अहमद फ़राज़

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कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत
जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है
- नातिक़ लखनवी

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Urdu Poetry: दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में

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