अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
हार हो जाती है जब मान लिया जाता है
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
- शकील आज़मी
मैं आँधियों के पास तलाश-ए-सबा में हूँ
तुम मुझ से पूछते हो मिरा हौसला है क्या
- अदा जाफ़री
जुर्म-ए-उल्फ़त पे हमें लोग सज़ा देते हैं
कैसे नादान हैं शो'लों को हवा देते हैं
- साहिर लुधियानवी
क़रार दिल को सदा जिस के नाम से आया
वो आया भी तो किसी और काम से आया
- जमाल एहसानी
Urdu Poetry: उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा