Urdu Poetry: लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी
लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
- बशीर बद्र   

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तुम से बिछड़ कर ज़िंदा हैं
जान बहुत शर्मिंदा हैं
- इफ़्तिख़ार आरिफ़ 

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सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा
इतना मत चाहो उसे वो बेवफ़ा हो जाएगा
- बशीर बद्र

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मुझ में थोड़ी सी जगह भी नहीं नफ़रत के लिए
मैं तो हर वक़्त मोहब्बत से भरा रहता हूँ
- मिर्ज़ा अतहर ज़िया  

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हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल
ऐ ज़िंदगी वगर्ना ज़माने में क्या न था
- आज़ाद अंसारी  

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नामा-बर तू ही बता तू ने तो देखे होंगे
कैसे होते हैं वो ख़त जिन के जवाब आते हैं
- क़मर बदायूंनी 

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Urdu Poetry: मैं हूँ दिल है तन्हाई है, तुम भी होते अच्छा होता

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