अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए
वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है
- मुनीर नियाज़ी
धीमे सुरों में कोई मधुर गीत छेड़िए
ठहरी हुई हवाओं में जादू बिखेरिए
- परवीन शाकिर
यहाँ किसी को भी कुछ हस्ब-ए-आरज़ू न मिला
किसी को हम न मिले और हम को तू न मिला
- ज़फ़र इक़बाल
अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे
बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे
- शकील बदायूंनी
आसमानों में उड़ा करते हैं फूले फूले
हल्के लोगों के बड़े काम हवा करती है
- मोहम्मद आज़म
मुझ को अक्सर उदास करती है
एक तस्वीर मुस्कुराती हुई
- विकास शर्मा राज़
Urdu Poetry: एहसाँ ये कीजिए कि ये एहसाँ न कीजिए