अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मुसाफ़िरों से मोहब्बत की बात कर लेकिन
मुसाफ़िरों की मोहब्बत का ए'तिबार न कर
- उमर अंसारी
वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी
ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है
- आसी ग़ाज़ीपुरी
'दाग़' के शेर जवानी में भले लगते हैं
'मीर' की कोई ग़ज़ल गाओ कि कुछ चैन पड़े
- गणेश बिहारी तर्ज़
वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो
वही यानी वादा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो
- मोमिन ख़ाँ मोमिन
हम से पूछो कि ग़ज़ल क्या है ग़ज़ल का फ़न क्या
चंद लफ़्ज़ों में कोई आग छुपा दी जाए
- जाँ निसार अख़्तर
दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था
- क़तील शिफ़ाई
Urdu Poetry: सहरा है पसंदीदा हम को हम शहर में जा कर क्या करते