Urdu Poetry: वो किसी तरह त'अल्लुक़ को बचा लेता है

Urdu Poetry: वो किसी तरह त'अल्लुक़ को बचा लेता है 

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वो किसी तरह त'अल्लुक़ को बचा लेता है
जब बिछड़ जाने के इम्कान नज़र आते हैं
-,अनम ज़ामी  

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कौन सी बात है तुम में ऐसी
इतने अच्छे क्यूँ लगते हो
- मोहसिन नक़वी 

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कली चटख़ के लबों के मिज़ाज तक पहुँची
गुलाब टूट के सुर्ख़ी-ए-गाल तक आए
- तौक़ीर अहमद

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देखूँ तिरे हाथों को तो लगता है तिरे हाथ
मंदिर में फ़क़त दीप जलाने के लिए हैं
- जाँ निसार अख़्तर

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उँगलियाँ फेर मेरे बालों में
ये मिरा दर्द-ए-सर नहीं जाता
- नदीम भाभा

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उँगलियाँ फेर मेरे बालों में
ये मिरा दर्द-ए-सर नहीं जाता
- नदीम भाभा

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Urdu Poetry: वो सो गया है मुझे ख़्वाब से जगाते हुए

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