अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
- जौन एलिया
आप के बा'द हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
- गुलज़ार
मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा
उस को छुट्टी न मिले जिस को सबक़ याद रहे
- मीर ताहिर अली रिज़वी
आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है
मुमकिन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाए
- बहज़ाद लखनवी
Urdu Poetry: क्यूँकर कहूँ कि कोई तमन्ना नहीं मुझे