Urdu Poetry: बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का
बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का
- असद अली ख़ान क़लक़ 

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कौन जाने कि उड़ती हुई धूप भी
किस तरफ़ कौन सी मंज़िलों में गई
- किश्वर नाहीद

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किसी पे करना नहीं ए'तिबार मेरी तरह
लुटा के बैठोगे सब्र ओ क़रार मेरी तरह
- फ़रीद परबती

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'नज़ीर' लोग तो चेहरे बदलते रहते हैं
तू इतना सादा न बन मुस्कुराहटें पहचान
- नज़ीर तबस्सुम

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वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का
जो पिछली रात से याद आ रहा है
- नासिर काज़मी

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मेरे कहने में है दिल जब तक मिरे पहलू में है
आप ले लीजे इसे ये आप का हो जाएगा
- बेख़ुद देहलवी

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