अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मैं आँधियों के पास तलाश-ए-सबा में हूँ
तुम मुझ से पूछते हो मिरा हौसला है क्या
- अदा जाफ़री
आप के बा'द हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
- गुलज़ार
मुझे भी लम्हा-ए-हिजरत ने कर दिया तक़्सीम
निगाह घर की तरफ़ है क़दम सफ़र की तरफ़
- शहपर रसूल
परेशानी अगर है तो परेशानी का हल भी है
परेशाँ-हाल रहने से परेशानी नहीं जाती
- अबरार अहमद काशिफ़
ज़िंदगी की ज़रूरतों का यहाँ
हसरतों में शुमार होता है
- अनवर शऊर
कटी है उम्र बस ये सोचने में
मिरे बारे में वो क्या सोचता है
- फ़हमी बदायूंनी
Urdu Poetry: मैं बहर-हाल किताबों में मिलूँगा तुम को