Urdu Poetry: तुम मुझ से पूछते हो मिरा हौसला है क्या

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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मैं आँधियों के पास तलाश-ए-सबा में हूँ
तुम मुझ से पूछते हो मिरा हौसला है क्या
- अदा जाफ़री 

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मैं क्या जानूँ घरों का हाल क्या है
मैं सारी ज़िंदगी बाहर रहा हूँ
- अमीर क़ज़लबाश  

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परेशानी अगर है तो परेशानी का हल भी है
परेशाँ-हाल रहने से परेशानी नहीं जाती
- अबरार अहमद काशिफ़ 

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तुम्हें तो ठीक से बर्बाद करना भी नहीं आता
चलो पीछे हटो अपनी ये हालत मैं बनाता हूँ
- शब्बीर हसन

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चराग़ घर का हो महफ़िल का हो कि मंदिर का
हवा के पास कोई मस्लहत नहीं होती
- वसीम बरेलवी

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तुम्हारा हुस्न आराइश तुम्हारी सादगी ज़ेवर
तुम्हें कोई ज़रूरत ही नहीं बनने सँवरने की
- असर लखनवी

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Urdu Poetry: जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने

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