अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
इक ख़्वाब ही तो था जो फ़रामोश हो गया
इक याद ही तो थी जो भुला दी गई तो क्या
- इफ़्तिख़ार आरिफ़
सोने से जागने का तअल्लुक़ न था कोई
सड़कों पे अपने ख़्वाब लिए भागते रहे
- आशुफ़्ता चंगेज़ी
रवाँ-दवाँ है ज़िंदगी चराग़ के बग़ैर भी
है मेरे घर में रौशनी चराग़ के बग़ैर भी
- अख्तर सईदी
बरसात का मज़ा तिरे गेसू दिखा गए
अक्स आसमान पर जो पड़ा अब्र छा गए
- लाला माधव राम जौहर
ज़िंदगी क्या जो बसर हो चैन से
दिल में थोड़ी सी तमन्ना चाहिए
- जलील मानिकपुरी
जिस से ये तबीअत बड़ी मुश्किल से लगी थी
देखा तो वो तस्वीर हर इक दिल से लगी थी
- अहमद फ़राज़
Urdu Poetry: यूँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या