Urdu Poetry: ये तिरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मअ'नी
ये तिरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को
- क़तील शिफ़ाई  

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अच्छे लोगों से मिल-जुल कर देखो ना
हम भी हैं हम से भी खुल कर देखो ना
- अन्नू रिज़वी  

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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
- शकील आज़मी 

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लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं
मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है
- अमीर क़ज़लबाश 

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जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब के
उसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा
- आबिद अदीब

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जिन हौसलों से मेरा जुनूँ मुतमइन न था
वो हौसले ज़माने के मेयार हो गए
- अली जवाद ज़ैदी 

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Urdu Poetry: हम ने घर की सलामती के लिए

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