अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
- जौन एलिया
ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम
मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं
- इमाम बख़्श नासिख़
जाने क्यूँ इक ख़याल सा आया
मैं न हूँगा तो क्या कमी होगी
- ख़लील-उर-रहमान आज़मी
कब धूप चली शाम ढली किस को ख़बर है
इक उम्र से मैं अपने ही साए में खड़ा हूँ
- अख़्तर होशियारपुरीव
दुनिया तो चाहती है यूँही फ़ासले रहें
दुनिया के मश्वरों पे न जा उस गली में चल
- हबीब जालिब
तमाम रात नहाया था शहर बारिश में
वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे
- जमाल एहसानी
Urdu Poetry: तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत