Urdu Poetry: वो सो गया है मुझे ख़्वाब से जगाते हुए

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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कहानी लिखते हुए दास्ताँ सुनाते हुए
वो सो गया है मुझे ख़्वाब से जगाते हुए
- सलीम कौसर

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मुद्दत से ख़्वाब में भी नहीं नींद का ख़याल
हैरत में हूँ ये किस का मुझे इंतिज़ार है
- शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम 

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छोड़ आया था मेज़ पर चाय
ये जुदाई का इस्तिआरा था
- तौक़ीर अब्बास

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सुना है शहर का नक़्शा बदल गया 'महफ़ूज़'
तो चल के हम भी ज़रा अपने घर को देखते हैं
- अहमद महफ़ूज़

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न कोई छत है न दीवार है न दरवाज़ा
ये मो'जिज़ा है कि हम ऐसे घर में रहते हैं
- अब्दुस्समद ख़तीब

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गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ से
पूछेंगे अपना हाल तिरी बेबसी से हम
- साहिर लुधियानवी

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Urdu Poetry: अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ

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