अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी
कुछ अपना हाल सँभालूँ अगर इजाज़त हो
- जौन एलिया
सारे जज़्बों के बाँध टूट गए
उस ने बस ये कहा इजाज़त है
- ख़्वाजा साजिद
वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
- परवीन शाकिर
आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है
- जिगर मुरादाबादी
जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
- नासिर काज़मी
ये शुक्र है कि मिरे पास तेरा ग़म तो रहा
वगर्ना ज़िंदगी भर को रुला दिया होता
- गुलज़ार
Urdu Poetry: धूप ने गुज़ारिश की एक बूँद बारिश की