Urdu Poetry: अच्छे लोगों से मिल-जुल कर देखो ना

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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अच्छे लोगों से मिल-जुल कर देखो ना
हम भी हैं हम से भी खुल कर देखो ना
- अन्नू रिज़वी 

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नज़रों से नापता है समुंदर की वुसअतें
साहिल पे इक शख़्स अकेला खड़ा हुआ
- मोहम्मद अल्वी

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हादसे राह के ज़ेवर हैं मुसाफ़िर के लिए
एक ठोकर जो लगी है तो इरादा न बदल
- ताहिर फ़राज़

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वो मस्लहत थी कि उन के हुज़ूर लब न हिले
ये हादिसा है कि दिल से भी कुछ कहा न गया
- अंजुम फ़ौक़ी बदायूंनी 

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बस सुनाते हो फ़ैसला अपना
तुम कभी मशवरा नहीं करते
- शाहरुख़ अबीर

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शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ
आँखें मिरी भीगी हुई चेहरा तिरा उतरा हुआ
- बशीर बद्र

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Urdu Poetry: मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे

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