Urdu Poetry: क्या हसीं ख़्वाब मोहब्बत ने दिखाया था हमें

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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क्या हसीं ख़्वाब मोहब्बत ने दिखाया था हमें
खुल गई आँख तो ताबीर पे रोना आया
- शकील बदायूंनी  

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वो ख़ुश हुआ कि उस को ख़सारा नहीं हुआ
मैं रो रहा था मेरा सहारा चला गया
- अमृतांशु शर्मा

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तेरे आने से यू ख़ुशी है दिल
जूँ कि बुलबुल बहार की ख़ातिर
- शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

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फिर दे के ख़ुशी हम उसे नाशाद करें क्यूँ
ग़म ही से तबीअत है अगर शाद किसी की
- हफ़ीज़ जालंधरी

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जो रो रहे हों उन की ख़ुशी में शरीक हों
जो हँस रहे हों उन को दिलासा दिया करें
- ओसामा ज़ुरैज़

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मुस्कुराना भी एक फ़न है 'अज़ीज़'
सब को आता नहीं ज़माने में
- अज़ीज़ ग़व्वासी

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Urdu Poetry: तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी

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