Urdu Poetry: ज़िंदगी एक नज़्म लगती है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है
- गुलज़ार 

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यही ज़िंदगी मुसीबत यही ज़िंदगी मसर्रत
यही ज़िंदगी हक़ीक़त यही ज़िंदगी फ़साना
- मुईन अहसन जज़्बी

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कभी आँखों पे कभी सर पे बिठाए रखना
ज़िंदगी तल्ख़ सही दिल से लगाए रखना
- बख़्श लाइलपुरी 

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तल्ख़ियाँ इस में बहुत कुछ हैं मज़ा कुछ भी नहीं
ज़िंदगी दर्द-ए-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं
- कलीम आजिज़

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ज़िंदगी हम से चाहती क्या है
चाहती क्या है ज़िंदगी हम से
- अजमल सिराज

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तेज़ हवा ने मुझ से पूछा
रेत पे क्या लिखते रहते हो
- मोहसिन नक़वी

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Urdu Poetry: हम फ़क़ीरों का पैरहन है धूप

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