अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दुनिया ने तजरबात ओ हवादिस की शक्ल में
जो कुछ मुझे दिया है वो लौटा रहा हूँ मैं
- साहिर लुधियानवी
थोड़ी सी अक़्ल लाए थे हम भी मगर 'अदम'
दुनिया के हादसात ने दीवाना कर दिया
- अब्दुल हमीद अदम
दुनिया तो है दुनिया कि वो दुश्मन है सदा की
सौ बार तिरे इश्क़ में हम ख़ुद से लड़े हैं
- जलील ’आली’
दुनिया में हम रहे तो कई दिन प इस तरह
दुश्मन के घर में जैसे कोई मेहमाँ रहे
- क़ाएम चाँदपुरी
इस तमाशे का सबब वर्ना कहाँ बाक़ी है
अब भी कुछ लोग हैं ज़िंदा कि जहाँ बाक़ी है
- फ़रियाद आज़र
इंसान का दिल क्या है दुनिया-ए-हवादिस में
टूटा हुआ तारा है टपका हुआ आँसू है
- सय्यद बशीर हुसैन बशीर
Urdu Poetry: आदमी अपने ख़यालात लिए फिरता है