अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
गो आबले हैं पाँव में फिर भी ऐ रहरवो
मंज़िल की जुस्तुजू है तो जारी रहे सफ़र
- नूर क़ुरैशी
इतने मायूस तो हालात नहीं
लोग किस वास्ते घबराए हैं
- जाँ निसार अख़्तर
परेशानी अगर है तो परेशानी का हल भी है
परेशाँ-हाल रहने से परेशानी नहीं जाती
- अबरार अहमद काशिफ़
तुम्हारा मिलना तो पहले भी कितना मुश्किल था
और अब की बार तो हालात भी ख़राब हुए
- ओसामा ज़ुरैज़
हमारे ऐब में जिस से मदद मिले हम को
हमें है आज कल ऐसे किसी हुनर की तलाश
- नातिक़ गुलावठी
आरज़ू है कि तू यहाँ आए
और फिर उम्र भर न जाए कहीं
- नासिर काज़मी
Urdu Poetry: अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला